कामशास्त्रियों का मत है कि संभोग के समय
नारी को निश्चेष्ट पड़े रहने की अपेक्षा उन्हें भी समान रूप से इसमें
हिस्सा लेना चाहिए। जब नारी के शरीर में वासना जगती हो तो वह अपने पुरुष
साथी से प्रेम की शुरुआत करे न कि प्रमी द्वारा इसके शुरु होने की अपेक्षा
करे।
पति-पत्नी दोनों के बीच प्रेम में जब खुलापन आ जाता है तो उनके रिश्ते और मजबूत ही होते हैं, लेकिन जब इनमें दुराव-छिपाव, संशय या संकोच होता है तो दोनों के बीच रिश्तों में गांठ आ सकती है। ऐसे रिश्तों में ही अविश्वास पनपता है। इसलिए अच्छा यह है कि दोनों में से जिसकी भी इच्छा प्रेम में पहल की हो, वो इसकी शुरुआत करे। आपसी प्रेम में संकोच और दूसरे से पहल की अपेक्षा रिश्तों को दीमक की तरह चाटने लगता है जो तनाव, कुंठा, मनमुटाव और दुराव के रूप में सामने आता है।
पति-पत्नी दोनों के बीच प्रेम में जब खुलापन आ जाता है तो उनके रिश्ते और मजबूत ही होते हैं, लेकिन जब इनमें दुराव-छिपाव, संशय या संकोच होता है तो दोनों के बीच रिश्तों में गांठ आ सकती है। ऐसे रिश्तों में ही अविश्वास पनपता है। इसलिए अच्छा यह है कि दोनों में से जिसकी भी इच्छा प्रेम में पहल की हो, वो इसकी शुरुआत करे। आपसी प्रेम में संकोच और दूसरे से पहल की अपेक्षा रिश्तों को दीमक की तरह चाटने लगता है जो तनाव, कुंठा, मनमुटाव और दुराव के रूप में सामने आता है।